नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया के आर्किटेक्चर एंड एकिस्टिक्स संकाय द्वारा गत 3 अक्तूबर 2019 को दो दिवसीय ‘ग्लोबल हेल्थ जेनिथ कंफ्लुएंस 2019’ शीर्षक से अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में इस्राइल के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया था। देश की बौद्धिक हस्तियों ने इस आयोजन के विरोध में संयुक्त हस्ताक्षरित बयान के द्वारा असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक मुस्लिम विरासत पर आधारित विश्वविद्यालय है, जहां मानवाधिकारों व मानवीय हितों के विरोधियों को हम बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। हम अपनी इस विरासत की हर मुमकिन रक्षा करेंगे। इसी दौरान जामिया के छात्रों द्वारा इस्राइल के प्रतिनिधियों के सम्मेलन में शामिल होने के विरोध में प्रदर्शन आयोजित किया गया, जो कि एक घंटे तक सम्मेलन स्थल के बाहर शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था। प्रदर्शन के बाद प्रॉक्टोरियल स्टाफ ने कुछ प्रदर्शनकारियों का अपहरण कर लिया, उनको पीटा तथा छेड़छाड़ करते हुए उन्हें प्रॉक्टर के कार्यालय परिसर के अंदर बंद कर दिया। इसके बाद, विश्वविद्यालय प्रशासन ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले पांच छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। छात्र समुदाय ने इस अलोकतांत्रिक कदम पर आपत्ति जताई और 7 अक्टूबर से सेंट्रल कैंटीन के सामने धरना शुरू कर दिया और जामिया के छात्रों के बढ़ते समर्थन से यह पूरी एकता के साथ अभी भी जारी है।

सय्यद अज़हरुद्दीन (महासचिव, एसआईओ ऑफ इंडिया) ने जामिया  के छात्रों के साथ एक संवाददाता सम्मेलन में मीडिया बात करते हुए कहा कि हम जामिया प्रशासन की इस आलोकतांत्रिक कारवाई की निंदा करते हैं। अज़हरुद्दीन ने आगे कहा कि आज जामिया मिल्लिया  इस्लामिया के छात्रों द्वारा 5 छात्रों को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के विरोध का आज दसवां दिन है। जामिया के छात्र समुदाय ने दिए गए नोटिसों को रद्द करने की मांग को लेकर कल वीसी कार्यालय के सामने सैकड़ों शांतिपूर्ण विरोध मार्च किया था। वीसी कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर रहे छत्रों पर विश्वविद्यालय प्रशासन के संरक्षण में गुंडों के एक समूह द्वारा बेल्ट, लाठी और गमलों द्वारा बेरहमी से हमला किया गया, जिसमें कई छात्र एवं छात्राएं गंभीर रूप से घायल हो गई। जिसमें गंभीर रूप से घायल छात्रों को बगल के हॉली फेमिली हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। एक नियंत्रित परिसर में, जहां किसी भी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश करने की अनुमति नहीं है,  ऐसे में गुंडे विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रोत्साहन और संरक्षण के बिना  कैसे कैम्पस में प्रवेश कर सकते हैं ।छात्रों ने वीसी कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन जारी रखा है, और आज (23 अक्टूबर 2019) विश्वविद्यालय के सभी छत्रों से क्लास बहिष्कार का आह्वान किया है । जेएमआई छात्रों द्वारा उन अधिकारियों के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं जो छात्रों के खिलाफ इस हमले के लिए जिम्मेदार हैं । हमले के शिकार छात्रों ने जामिया नगर पुलिस स्टेशन में गुंडों के एक आपराधिक मामलों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की है, लेकिन अबतक पुलिस ने शिकायत प्राप्त करने के बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं की है (23 अक्टूबर 2019 12:00 बजे  तक)। एसआईओ की जामिया के छात्रों के साथ मिलकर मांगे निम्नवत हैं:1. शो-कॉज़ नोटिस जारी किए गए पांच जामिया छात्रों से वापस लिया जाए 2. प्रदर्शनकारी छात्रों पर हमला करने वाले अपराधियों की जल्द गिरफ्ताररी करें3. अपराधियों के पीछे से प्रोत्साहन और संरक्षण दे रहे प्रशासनिक कर्मचारियों को निलंबित करें।4. जामिया मिल्लिया इस्लामिया में विश्वविद्यालय छात्र संघ की स्थापना के माध्यम से लोकतांत्रिक माहौल को बहाल करें ।

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